"तांडव हवेली का आखिरी दरवाज़ा"
राजस्थान के एक छोटे से गांव “पाथरपुर” के किनारे एक पुरानी हवेली थी —
तांडव हवेली। लोग कहते थे कि ये हवेली कभी राजघराने की थी, लेकिन अब ये एक श्राप बन चुकी थी। 80 सालों से वहां कोई नहीं गया था। जो गया... लौटकर नहीं आया।गांव वाले उस हवेली का नाम सुनकर कांप जाते थे। बच्चों को डराने के लिए मांएं कहती थीं, “अगर शरारत की तो तांडव हवेली भेज दूंगी।” लोगों का मानना था कि वहां आत्माएं नहीं, कुछ और रहता है — कुछ ऐसा जो इंसानों से नफरत करता है।
एंट्री चार दोस्तों की:
2023 की गर्मियों में चार दोस्त — राघव, विशाल, तनु और मेघा — गांव घूमने आए थे। वो सभी एक हॉरर ब्लॉग चैनल चलाते थे: “FearUnlocked”। उन्हें जैसे ही तांडव हवेली के बारे में पता चला, वे वहीं जाने को उत्सुक हो गए।
गांव वालों ने बहुत मना किया, “बच्चो, वहां मौत रहती है। जो गया, वो फिर दिखाई नहीं दिया।” लेकिन दोस्तों ने इसे अफवाह समझा।
शाम को 6 बजे, वे सभी कैमरा और टॉर्च लेकर हवेली के अंदर घुसे।
हवेली के अंदर का मंजर:
हवेली के दरवाज़े पर ही लिखा था — "ये अंतिम प्रवेश है, इसके आगे समय भी नहीं बचता।"
भीतर जाते ही एक ठंडी हवा का झोंका आया। हवेली अंधेरे और सड़ांध से भरी थी। दीवारों पर खून के छींटे, और लकड़ी की ज़मीन पर जैसे कोई किसी को घसीटता रहा हो।
हर कोने से कोई फुसफुसाता, लेकिन कोई नज़र नहीं आता। कमरे पुराने थे लेकिन उनमें अभी भी धूल न थी... मानो कोई वहाँ रह रहा हो।
राघव ने कहा, “ये सब एक्टिंग होगी, कोई मज़ाक कर रहा है।” तभी विशाल को किसी ने पीछे से धक्का दिया — लेकिन वहां कोई नहीं था।
कैमरे की स्क्रीन ब्लर होने लगी। और तभी तनु एक कमरे में चली गई। वो कमरा था — “आखिरी दरवाज़ा”।
आखिरी दरवाज़े के अंदर:
ये कमरा कभी नहीं खुला था, गांव के बुजुर्ग बताते थे कि यहां कुछ ऐसा बंद है जिसे दुनिया से छुपाना पड़ा।
दरवाज़ा जैसे ही खुला, एक झटका हुआ। अंदर अंधेरा था, बस एक पुरानी कुर्सी और एक आईना।
आईने में... सिर्फ तीन दोस्त दिख रहे थे। तनु नहीं।
तभी एक आवाज़ गूंजी —
"जो आई, वो कभी जा नहीं सकती।"
एकदम से कमरे की दीवारें हिलने लगीं, टॉर्च की रोशनी बुझ गई, और कैमरा खुद-ब-खुद रिकॉर्डिंग रोकने लगा।
राघव चिल्लाया, “तनु कहां है?”
अचानक, दीवारों पर लिखा दिखा — "अब एक-एक करके सब यहीं रहेंगे..."
भय की शुरुआत:
मेघा रोने लगी, विशाल दीवार के पास गिर पड़ा — उसका शरीर अकड़ने लगा था। उसकी आंखें सफेद हो चुकी थीं।
राघव ने तनु को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उसकी हंसी हर कमरे से गूंज रही थी।
"राघव, तुमने मना किया था ना… फिर भी आए?"
राघव ने कैमरे से देखा — और जो दिखा, वो किसी का चेहरा नहीं था। वो एक आकृति थी — बिना आंखों के, बिना मुंह के — पर वो तनु की आवाज़ में बात कर रही थी।
सुबह का सच:
अगली सुबह गांव वाले आए, क्योंकि हवेली से रात भर चीखों की आवाज़ें आती रही थीं।
हवेली खाली थी।
सिर्फ एक कैमरा पड़ा था हवेली के दरवाज़े पर, जिस पर खून से लिखा था —
"अब अगला नंबर तुम्हारा है।"
उस कैमरे की रिकॉर्डिंग आज भी कोई नहीं खोल सका। जिसने खोला, उसकी आंखें फट गईं — और वो पागल हो गया।
MR.SANJAY
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